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सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

रोज दो पैग से बढ़ता है अंधेपन का खतरा

लंदन। डायबिटीज के मरीजों में रोज दो पैग अल्कोहल के सेवन से अंधेपन का खतरा बढ़ सकता है। एक नए शोध में नीदरलैंड्स की यूट्रैस्ट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है।

डेली मेल में प्रकाशित खबर के अनुसार, पहले के अध्ययनों में यह बात सामने आई थी कि डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए अल्कोहल की थोड़ी मात्रा रोज लेना फायदेमंद है और रेड वाइन दिल की बीमारियों के खतरे को कम करती है।

नए अध्ययन ने सलाह दी है कि डायबिटीज के मरीजों के लिए अल्कोहल का प्रतिदिन सेवन हानिकारक है। इससे उन मरीजों में अंधता की समस्या पैदा हो सकती है। इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने 12 सौ से ज्यादा डायबिटीज के मरीजों को शामिल किया था।

उनकी आंखों का परीक्षण किया गया। पांच साल बाद उनमें से करीब 182 मरीज डायबिटीज के कारण नजर की समस्या से ग्रस्त हो गए थे। इस दौरान उन लोगों में नजर की समस्याएं नहीं बढ़ी, जिन्होंने अल्कोहल नहीं लिया था। परीक्षण में अल्कोहल लेने वालों में करीब सात सौ लोगों में नजर की समस्या में बढ़ोत्तरी देखी गई।

'डायबिटिक मेडीसिन' जर्नल में छपे इस अध्ययन के मुताबिक रोजाना औसतन दो पैग लेने वाले पचास फीसदी लोगों में नजर की समस्याएं बढ़ी हैं। डायबिटीज पर शोध के प्रमुख विक्टोरिया किंग ने कहा, 'यह अध्ययन बताता है कि अल्कोहल की मात्रा बढ़ाने पर नजर की समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है।

उम्र से दिखें कम

सुंदर और अपनी वास्तविक उम्र से कम दिखना इंसान की एक स्वाभाविक चाहत है। इन दिनों लोग अपनी वास्तविक उम्र से कम दिखने के लिए काफी धन व्यय कर रहे हैं। विभिन्न तरह की क्रीमों व दवाओं पर खर्च करने के बाद भी जब वांछित नतीजे नहीं मिलते, तब वे स्वयं को ठगा हुआ महसूस करते है, लेकिन अब आपको ऐसा महसूस करने की जरूरत नहींहै। ऐसा इसलिए, क्योंकि लिक्विड फेस लिफ्ट दुनिया की एक ऐसी चमत्कारिक तकनीक है, जिसके द्वारा सिर्फ आधा घंटे में किसी सर्जरी के बगैर आपकी वास्तविक उम्र कम दिख सकती है और आप पूर्व की तुलना में कहीं ज्यादा युवा दिख सकते है। इसतकनीक के द्वारा चेहरे से हल्की व गहरी लाइनें व झुर्रियां हटाकर और त्वचा में कसाव लाकर आप सुंदर व दमकता चेहरा पा सकतीं/ सकते हैं। गौरतलब है कि लिक्विड फेश लिफ्ट का प्रयोग 40 से 60 साल की उम्र के मध्य कराया जा सकता है।

[कैसे बनती है झुर्रियां]

उम्र बढ़ने के साथ त्वचा में कोलेजन की कमी व इलैस्टिन (Elastin) में ढीलापन मांसपेशियों और त्वचा के बीच लचीलापन बढ़ाता है। नतीजतन, त्वचा ढीली पड़ जाती है, जो झुर्रियों के रूप में दिखायी देती है। गौरतलब है कि कोलेजन त्वचा की परत में पाया जाने वाला एक तत्व है और इसी तरह इलैस्टिन भी स्वस्थ व कसी हुई त्वचा के लिए आवश्यक होता है।

[इलाज]

लिक्विड फेस लिफ्ट तकनीक के अंतर्गत 'फिलर' और बोटॉक्स (Boto3) का समायोजन किया जाता है। फिलर, हाइलुरोनिक एसिड नामक प्राकृतिक पदार्थ से बनता है, जो अपने शरीर में भी पाया जाता है। बोटॉक्स एक विशेष किस्म का प्रोटीन है, जो त्वचा के ढीलेपन को दूर करता है। ढीली पड़ गयी त्वचा के अन्दर इंजेक्शन द्वारा फिलर भर देने से त्वचा का कसाव वापस आ जाता है और लाइनें व झुर्रियां हट जाती है।

फिलर कहां और कितना इस्तेमाल करना है, यह विशेषज्ञ डॉक्टर के अनुभव और कौशल पर निर्भर करता है। चेहरे के कुछ खास भागों पर इसका इस्तेमाल जादुई असर करता है। जैसे नाक और होंठों के बीच की गहरी लाइनें, होंठों व ठुड्डी के बीच और आंखों के नीचे के गड्ढे पर। लिक्विड फेस लिफ्ट में इस्तेमाल होने वाला एक अन्य केमिकल 'बोटुलीनियम प्रोटीन' है।

बोटॉक्स इंजेक्शन मांसपेशियों में लगाया जाता है। यह डिप्रेशर मांसपेशियों (मांसपेशियों का एक प्रकार)को विश्राम की स्थिति में लाकर 'लीवेशन मांसपेशियों' को ऊपर की तरफ खींचकर त्वचा में कसाव लाता है। फिलर्स और बोटॉक्स साथ में या फिर अकेले इस्तेमाल होते है, परन्तु ये दोनों साथ में इस्तेमाल होने पर एक दूसरे का कार्यकाल बढ़ाते है। मैं फिलर का इस्तेमाल लिक्विड फेस लिफ्ट के अलावा होंठों को भरा हुआ बनाने और नाक के छोटे विकारों (माइनर डिफेक्ट्स) को दूर करने के लिये भी करती हूं। इसी तरह मैं बोटॉक्स का इस्तेमाल चेहरे को पतला व सुंदर दिखाने के लिए भी करती हूं।

[डॉ. निशिता शेठ]